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Friday, 29 March 2019

ये आँसू तुझको बुला रहे हैं

ये आँसू तुझको बुला रहे हैं
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ये रातें ज़ुल्मी सता रही हैं
   ये यादें तेरी  रुला रही हैं

तुम नहीं तो है कौन मेरा
   रुदन नहीं ये बुला रही हैं

 हैं सूनी राहें और ये निग़ाहें
    तुम्हें न पा के तड़पा रही हैं

जो आग तुमने लगा है रखी
 आँसू उसे अब ये  बुझा रहे हैं

इन आँसुओं में प्रीति है देखो
  तुम्हें खुशी दे खुद  रो रहे हैं

खुद रो रहे हैं बुला रहे हैं
   हाल-ए- दिल  ये बता रहे हैं

है उम्मीद मेरी ये आरजू मेरी
  ये हसरतें मेरी  शिकायतें मेरी

ठहर जा पल भर वो जाने वाले
  ये प्यास है मेरी  बुला  रही है

तुम्ही से तो थीं खुशियाँ हैं मेरी
   अर्ज ये सुन लो थमे जो आँसू

न कोई मंज़िल न है ठिकाना
   इन अश्कों को यूँ बहते है जाना

है तोहफ़ा तेरा मेरे दो आँसू
   मन के  मोती  ये  श्रृंगार मेरे

शोलोंं पे मचलती बन के शबनम
     ये आग दिल  की  बुझा रही है

ठहर जा पल भर,वो जाने वाले
   ये आँसू  तुझको  बुला  रहे हैं

   ये   अश्रु  मेरे  ये  नीर मेरे
     नयनों  का जल है  ये पीर मेरे

  गुजर  गये जो  थे वक्त  मेरे
     वे आँसू  बन क्यों बिखर रहे हैं

                  -व्याकुल पथिक











16 comments:

  1. जी धन्यवाद निश्छल जी

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  2. बेहतरीन प्रस्तुति

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  3. जी प्रणाम, धन्यवाद।

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  4. ये अश्रु मेरे ये नीर मेरे
    नयनों का जल है ये पीर मेरे ।
    अप्रतिम¡ बेहतरीन सृजन।

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  5. जी प्रणाम धन्यवाद।

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  6. जी धन्यवाद, प्रणाम।

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  7. ये अश्रु मेरे ये नीर मेरे
    नयनों का जल है ये पीर मेरे

    गुजर गये जो थे वक्त मेरे
    वे आँसू बन क्यों बिखर रहे हैं
    प्रिय शशि भाई -- आसूं ही आसूं -- वेदना ही वेदना -- इस रचना के एक एक शब्द में यही है --पर --
    लाख बहाए आसूं कोई नहीं लौटते जाने वाले
    जाने कहाँ बसाते बस्ती -- तोड़ निकलते दिल के शिवाले !
    आपकी ये वेदना सृजन के कीर्तिमान रचे मेरी यही कामना है | शुभकामनाएँ |

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  8. यूँ तो ब्लॉग की साज सज्जा दो दिन से देख रही हूँ पर आज लिख पा रही हूँ | बहुत ही सुंदर , मन को सुकून से भरने वाला रंग रूप है | बहुत ही अच्छा दिख रहा है |

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  9. जी रेणु दी।
    प्रणाम।
    मेरा प्रिय रंग है यह।

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  10. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक
    १ अप्रैल २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  11. ठहर जा पल भर,वो जाने वाले
    ये आँसू तुझको बुला रहे हैं

    ये अश्रु मेरे ये नीर मेरे
    नयनों का जल है ये पीर मेरे
    बेहतरीन लेखन हेतु साधुवाद । बहुत-बहुत बधाई आदरणीय ।

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  12. धन्यवाद, प्रणाम भाई साहब।

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    1. आपके इस संबोधन से मन प्रसन्न हो गया, भाई साहब।

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  13. जी मुझे भी बहुत अच्छा लगा।

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  14. बहुत ही सुन्दर... हृदयस्पर्शी रचना...
    वाह!!!

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  15. अच्छा लिखा है। मन की वेदना को मर्मस्पर्शी शब्द दे दिए आपने।

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yes